Jamshedpur : ( Jamshedpur Muharram) साकची स्थित हुसैनी मिशन के इमामबाड़े में सोमवार को मुहर्रम की चार तारीख को मजलिस बड़े अदब और अकीदत के साथ अंजाम दी गई। मजलिस को मौलाना सादिक अली ने खिताब करते हुए कहा कि इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम का मातम करना न सिर्फ जायज़ है, बल्कि यह दीन की समझ और हक़ की पहचान का हिस्सा भी है। उन्होंने कहा कि हमारे नबी मोहम्मद (स.) रहमत बनकर आए और उनके नवासे इमाम हुसैन ने इस्लाम को ज़िंदा रखने के लिए कर्बला के तपते रेगिस्तान में अपनी जान कुर्बान कर दी। (Jamshedpur Muharram)
मौलाना ने कहा कि कर्बला का ज़िक्र इंसान को मुरझाने नहीं देता, बल्कि उसमें हिम्मत और हौसला पैदा करता है। उन्होंने कहा कि कुरान जिनकी शान में उतरी, उनके फज़ाइल बयान करना ईमान का हिस्सा है। आज के मुसलमान को सिर्फ जुबान से नहीं, बल्कि अपने किरदार और अख़लाक से हुसैनी बनना होगा।
इसे भी पढ़ें – Jamshedpur Muharram: साकची में हुसैनी मिशन के इमामबाड़े में हुई मजलिस, इमाम हुसैन की कर्बला आमद की दास्तान हुई बयां
उन्होंने कहा – “पूरी कायनात जिसकी नाज़बरदारी करे, उसे मोहम्मद कहा जाता है, और मोहम्मद जिसकी नाज़बरदारी करें, उसे हुसैन कहा जाता है।” मौलाना सादिक अली ने यज़ीदियत की पहचान और हुसैनी राह को आज के दौर में सबसे अहम पैग़ाम बताया। कहा कि सच्चा मुसलमान वही है, जो हुसैन की अज़मत को माने और जालिम के खिलाफ खड़ा हो।

Jamshedpur Muharram: साकची में मजलिस पढ़ते मौलाना सादिक अली
मजलिस के दौरान जब मौलाना ने शहादत-ए-हुसैन का मंजर बयान किया, तो माहौल ग़मगीन हो गया। अजादारों की आंखों से आंसू बहने लगे। इससे पहले हुसैनी मिशन के इनाम अब्बास ने मर्सिया पढ़ा, जिससे माहौल मातम में डूब गया। नौहाख़्वानी भी हुई। इस मौके पर मुनीर हसन, रईस रिज़वी ‘छब्बन’ और मोहम्मद राशिद भी मौजूद रहे। हुसैनी मिशन की यह मजलिस सिर्फ याद-ए-शहादत नहीं थी, बल्कि यह एक पैग़ाम भी था – ज़ुल्म के खिलाफ और हक़ के साथ खड़े होने का।




