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जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के 20 साल पूरे, जनवरी 2027 में होगा ऐतिहासिक आयोजन

Jaipur : दुनिया के चर्चित साहित्यिक आयोजनों में शामिल वेदांता जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल जनवरी 2027 में अपने 20वें संस्करण के साथ दो दशक की यात्रा पूरी करेगा। राजस्थान सरकार के सहयोग से आयोजित होने वाला यह महोत्सव 14 से 18 जनवरी 2027 तक जयपुर में आयोजित किया जाएगा। इस बार आयोजन की थीम ‘विचारों, कहानियों और संवाद के 20 साल’ रखी गई है।

2006 में शुरू हुए जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल ने दो दशकों में साहित्य, संस्कृति और विचार-विमर्श के लिए एक वैश्विक मंच के रूप में अपनी पहचान बनाई है। अब तक महोत्सव में 8,000 से अधिक लेखक, वक्ता और कलाकार शामिल हो चुके हैं, जबकि 50 लाख से ज्यादा दर्शक इससे जुड़ चुके हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म और प्रसारण माध्यमों के जरिए इसकी पहुंच एक अरब से अधिक लोगों तक बताई गई है।

महोत्सव का विस्तार भारत से बाहर भी हुआ है। अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, स्पेन, ऑस्ट्रेलिया, मध्य पूर्व, मालदीव और आयरलैंड सहित विभिन्न देशों में इसके 15 से अधिक अंतरराष्ट्रीय संस्करण आयोजित किए जा चुके हैं।

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल केवल साहित्य तक सीमित नहीं रहा है। यहां इतिहास, राजनीति, विज्ञान, अर्थशास्त्र, दर्शन, कला, स्वास्थ्य, प्रवासन और पर्यावरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा होती रही है। भारतीय भाषाओं के साथ-साथ दुनिया की विभिन्न भाषाओं के लेखकों को मंच देकर महोत्सव ने भाषाई विविधता और अनुवाद को भी बढ़ावा दिया है।

20वें संस्करण की खास बात यह है कि इसकी घोषणा भारत की सभी 22 आधिकारिक भाषाओं में की गई है। आयोजकों के अनुसार, यह भारत की विविध भाषाई और साहित्यिक परंपराओं को सम्मान देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

टीमवर्क आर्ट्स के प्रबंध निदेशक और महोत्सव के निर्माता संजॉय के. रॉय ने कहा कि किताबों और विचारों में लोगों को जोड़ने की अद्भुत क्षमता होती है। लेखकों की भागीदारी, पाठकों की जिज्ञासा और खुले संवाद के प्रति प्रतिबद्धता ने इस महोत्सव को दो दशक का सफर तय करने में मदद की है।

महोत्सव की सह-निदेशक नमिता गोखले ने कहा कि भारत की पहचान उसकी समृद्ध साहित्यिक विरासत और भाषाई विविधता से जुड़ी है। वहीं, टीमवर्क आर्ट्स की प्रमुख प्रीता सिंह ने कहा कि पिछले 20 वर्षों में यह आयोजन दुनिया के प्रमुख साहित्यिक और सांस्कृतिक मंचों में अपनी जगह बना चुका है। उन्होंने आने वाले वर्षों में नए दर्शकों तक पहुंचने और स्वतंत्र, समावेशी तथा सार्थक सांस्कृतिक संवाद को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई।

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