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ईरान के आईआरजीसी प्रमुख का ऐलान: शहीद आयतुल्ला अली खामेनेई के मिशन को आगे बढ़ाएगा प्रतिरोध मोर्चा

Tehran: ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्सइस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) के कमांडर-इन-चीफ ने कहा है कि ईरान और प्रतिरोध मोर्चा (रेज़िस्टेंस फ्रंट) शहीद नेता आयतुल्ला सैय्यद अली खामेनेई के मिशन को पूरी दृढ़ता के साथ आगे बढ़ाएंगे और उनकी हत्या के जिम्मेदार लोगों को न्याय के कटघरे तक पहुंचाने का संकल्प (Iran Supreme Leader Funeral) जारी रहेगा।

शुक्रवार को जारी अपने बयान में आईआरजीसी प्रमुख ने कहा कि ईरान और इराक में एक सप्ताह तक चले अभूतपूर्व अंतिम विदाई समारोह ने यह साबित कर दिया कि देश की जनता और नेतृत्व के बीच अटूट विश्वास और गहरा रिश्ता Iran (Supreme Leader Funeral) कायम है।

उन्होंने कहा कि विलायत-ए-फकीह की सबसे बड़ी पहचान यह है कि 47 वर्षों तक नेतृत्व करने वाले नेता को विदा करने के लिए पूरा देश आंसुओं के समंदर में उमड़ पड़ा। उन्होंने ईरानी जनता को दूरदर्शी, धैर्यवान और अडिग बताते हुए अंतिम संस्कार की व्यवस्था में जुटे अधिकारियों, स्वयंसेवकों और आयोजकों का भी आभार व्यक्त किया। उनके अनुसार सभी ने सूझबूझ, बेहतर योजना और अथक मेहनत से पूरे कार्यक्रम को गरिमा, सुरक्षा और अनुशासन के साथ संपन्न कराया।

आयतुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार का समापन पवित्र शहर मशहद में हुआ। इससे पहले तेहरान, क़ोम, इराक के नजफ़ और कर्बला में भी लाखों-करोड़ों लोगों ने शोक जुलूस और श्रद्धांजलि सभाओं में भाग लिया।

मशहद में लाखों श्रद्धालुओं ने शहीद नेता और उनके परिवार के सदस्यों के जनाज़े के साथ अंतिम यात्रा में हिस्सा लिया। इमाम रज़ा (अ.स.) के पवित्र रौज़े में उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया गया। ईरान के विभिन्न प्रांतों के अलावा दुनिया के कई देशों से आए लोगों ने भी इस ऐतिहासिक विदाई समारोह में भागीदारी की।

फार्स न्यूज़ एजेंसी के आधिकारिक अनुमान के अनुसार छह दिनों तक पांच शहरों में आयोजित अंतिम विदाई कार्यक्रमों में 4.1 करोड़ से 4.3 करोड़ लोगों ने हिस्सा लिया, जिसे रिकॉर्ड इतिहास का सबसे बड़ा अंतिम संस्कार जुलूस बताया जा रहा है।

आईआरजीसी प्रमुख ने कहा कि जनता की ऐतिहासिक भागीदारी ने एक बार फिर इस्लामी क्रांति के आदर्शों के प्रति राष्ट्र की प्रतिबद्धता और शहीद नेता के साथ किए गए संकल्प को दोहराया है। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन (अ.स.) के लाल परचम के साये में एकजुट हुई यह भीड़ अन्याय और अत्याचार के खिलाफ खड़ी स्वतंत्र राष्ट्रों की एकता का प्रतीक है।

इसे भी पढ़ें – मशहद में सुपुर्द-ए-खाक हुए आयतुल्ला सैयद अली खामेनेई, लाखों-करोड़ों लोगों ने दी अंतिम विदाई

उन्होंने कहा कि शहीद नेता का खून पूरी उम्मत के लिए जागरूकता, सम्मान, शक्ति और एकजुटता का नया स्रोत बनेगा तथा इससे ईरान और प्रतिरोध मोर्चे का हौसला और मजबूत होगा। साथ ही ईरान के विरोधियों को अंततः पराजय, अलगाव और पछतावे का सामना करना पड़ेगा।

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