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Ranchi : झारखंड की आत्मा कहे जाने वाले झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक और तीन बार के मुख्यमंत्री रहे शिबू सोरेन उर्फ दिशोम गुरु (Shibu Soren Funeral ) के निधन के बाद पूरे राज्य में शोक की लहर है। लेकिन उनके बेटे की एक मार्मिक प्रतिक्रिया ने लोगों के दिलों को झकझोर कर रख दिया है।
अपने पिता को श्रद्धांजलि (Shibu Soren Funeral) देते हुए उन्होंने कहा—
“मेरे सिर से सिर्फ पिता का साया नहीं गया, झारखंड की आत्मा का स्तंभ चला गया।”
वे उन्हें सिर्फ ‘बाबा’ नहीं, बल्कि पथप्रदर्शक, संघर्षों की जड़, और झारखंडियों की छाया बताते हैं। एक साधारण आदिवासी किसान परिवार में जन्मे शिबू सोरेन ने जमींदारी शोषण के खिलाफ जो आग अपने भीतर महसूस की, उसे एक आंदोलन में बदल दिया, जो आगे चलकर झारखंड राज्य के निर्माण का आधार बना।
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उनके बेटे सीएम हेमंत सोरेन ने भावुक होकर कहा—
“बचपन में मैं पूछता था, बाबा आपको दिशोम गुरु क्यों कहते हैं?
तो वो मुस्कुराकर कहते:
‘क्योंकि मैंने उनका दुख समझा और उनकी लड़ाई अपनी बना ली।'”
उनके शब्दों में एक दृढ़ वादा भी था—
“मैं झारखंड को झुकने नहीं दूंगा,
आपके नाम को मिटने नहीं दूंगा।
आपका संघर्ष अधूरा नहीं रहेगा।”
वे बताते हैं कि बाबा का संघर्ष किसी किताब से नहीं, बल्कि पसीने, आवाज़ और फटी चप्पल में छिपी एड़ी से समझा जा सकता है। उन्होंने सिर्फ सत्ता नहीं चाही, बल्कि राज्य को झारखंडी पहचान दिलाने की लड़ाई लड़ी।
इस भावनात्मक श्रद्धांजलि में उन्होंने झारखंड के हर गांव, हर मांदर की थाप और हर गरीब की आंखों में अपने बाबा को जीवित बताया। और अंत में नारा लगाया।
“वीर शिबू जिंदाबाद! दिशोम गुरु अमर रहें!
जय झारखंड, जय जय झारखंड!”
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