Jamshedpur (Jharkhand) : माझी पारगमा माहाल पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था धाइ कुचूं बारहा पालको सिम दिशोम, कोल्हान प्रमंडल के संयुक्त तत्वावधान में 6 सितंबर को दिसोम जाहेरथान, कोरोनडीह में धोरोम सेनेलेद् 2026 (Jamshedpur Dhorom Seneled) 2026 का आयोजन किया जाएगा। सम्मेलन की तैयारियों को लेकर 3 सितंबर को सर्किट हाउस परिसदन, बिष्टुपुर में संवाददाता सम्मेलन आयोजित किया गया।
Jamshedpur Dhorom Seneled 2026 के संवाददाता सम्मेलन में परगना बाबाओं ने कहा कि संथाल समाज की अपनी विशिष्ट पहचान, परंपराएं और सामाजिक व्यवस्था है। समाज के पारंपरिक रीति-रिवाज, धर्म-संस्कृति, पूजा पद्धति और न्याय प्रणाली पूर्वजों की दीर्घकालिक चिंतन प्रक्रिया से विकसित हुई है। माझी पारगना व्यवस्था इसी पारंपरिक स्वशासन प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो आज भी समाज में प्रचलित है।
उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 13(3)(क) के तहत प्रचलित प्रथाओं और परंपराओं को मान्यता प्राप्त है। संथाल समाज का संचालन अपनी पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था और सामाजिक मान्यताओं के अनुरूप होता है।
नई पीढ़ी को धर्म-संस्कृति से जोड़ना उद्देश्य
वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में समाज के लोग अपनी पारंपरिक व्यवस्था, धर्म-संस्कृति, पूजा पद्धति और न्याय प्रणाली से दूर होते जा रहे हैं। यह समाज के लिए चिंता का विषय है। धोरोम सम्मेलन का उद्देश्य लोगों को धार्मिक व्यवस्था से जोड़े रखना, नई पीढ़ी को धार्मिक क्रियाकलापों और मान्यताओं से परिचित कराना तथा धार्मिक आस्था को मजबूत बनाना है।
सम्मेलन में धार्मिक धरोहरों और पारंपरिक स्थलों के संरक्षण पर भी चर्चा की जाएगी। इनमें मारांग बुरु, लुगु बुरु, आजोदिया बुरु, जांड बाहा, तुपुनाई घाट और राजरपा जैसे धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थल शामिल हैं
धर्मांतरण के प्रयासों से सतर्क रहने की अपील
परगना बाबाओं ने कहा कि समाज दुनिया के सभी धर्मों का सम्मान करता है। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ वर्षों से अन्य समुदायों और धर्मों के लोग आदिवासियों को आकर्षित कर धर्मांतरण का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास कानूनन अपराध हैं और समाज को इस संबंध में सतर्क रहने की आवश्यकता है।
वक्ताओं ने यह भी कहा कि कुछ लोग धर्म के नाम पर आदिवासी समाज को बांटने का प्रयास कर रहे हैं। सम्मेलन के माध्यम से समाज के लोगों को धार्मिक मान्यताओं के प्रति जागरूक करने और धर्म-संस्कृति के प्रचार-प्रसार का प्रयास किया जाएगा।
समाज से सम्मेलन में शामिल होने की अपील
परगना बाबाओं ने समाज के लोगों से अपील की कि वे 6 सितंबर को दिसोम जाहेरथान, कोरोनडीह में आयोजित धोरोम सेनेलेद् 2026 में शामिल हों। उन्होंने कहा कि सम्मेलन के माध्यम से पारंपरिक धर्म, संस्कृति और स्वशासन व्यवस्था को मजबूत करने का संदेश दिया जाएगा।
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