Home > Entertainment > Busan International Film Festival : अंतर्राष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में ईरानी फिल्म मिड डे मील का जलवा, जीता बेस्ट फिल्म का अवार्ड

Busan International Film Festival : अंतर्राष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में ईरानी फिल्म मिड डे मील का जलवा, जीता बेस्ट फिल्म का अवार्ड

ईरानी फिल्मकार मजीद मजीदी ने अमेरिका पर साधा निशाना, बोले- प्रतिबंधों और युद्ध की मार झेल रहे आम लोग

Busan (South Korea) : ईरानी फिल्मकार मजीद मजीदी ने अमेरिका की सैन्य कार्रवाई और ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों की कड़ी आलोचना की है। दक्षिण कोरिया में आयोजित 31वें बुसान अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में पहुंचे मजीदी ने कहा कि इन प्रतिबंधों और युद्ध का सबसे ज्यादा असर आम ईरानी नागरिकों, गरीब परिवारों और बच्चों पर पड़ (Busan International Film Festival) रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान के लोग इस दबाव के सामने झुकने वाले नहीं हैं।

मजीदी अपनी नई फिल्म ‘मिडडे मील’ के प्रीमियर के लिए बुसान पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि मौजूदा हालात में ईरान छोड़कर दक्षिण कोरिया आना उनके लिए बेहद मुश्किल फैसला था। वह मानसिक रूप से थके हुए थे और देश से बाहर नहीं जाना चाहते थे। हालांकि, बाद में उन्हें लगा कि उनकी फिल्म के माध्यम से ईरान के लोगों की पीड़ा दुनिया तक पहुंच सकती है। इसी उम्मीद के साथ उन्होंने महोत्सव में शामिल होने का निर्णय लिया।

 मिनाब स्कूल पर हमले का किया जिक्र

मजीदी ने ईरान में नागरिकों की मौत और संपत्तियों को हुए नुकसान का उल्लेख करते हुए दावा किया कि युद्ध के दौरान लगभग 1.50 लाख घर क्षतिग्रस्त या नष्ट हुए हैं। उन्होंने मिनाब में एक प्राथमिक विद्यालय पर बमबारी का जिक्र करते हुए कहा कि इस हमले में 156 नागरिकों की मौत हुई, जिनमें 120 स्कूली बच्चे (Busan International Film festival) शामिल थे।

उन्होंने कहा कि दुनिया के लोग सच्चाई को देख रहे हैं और समझ रहे हैं कि सही क्या है और गलत क्या। ईरानी जनता साहसी और सम्मानित है तथा वह अन्य देशों पर अपना नियंत्रण थोपने की कोशिशों को स्वीकार नहीं करेगी।

रिपोर्ट के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र के एक तथ्य-जांच मिशन ने सितंबर में कहा था कि उसके पास यह मानने के उचित आधार हैं कि मिनाब के स्कूल पर हमले के लिए अमेरिकी सेना जिम्मेदार थी और यह हमला युद्ध अपराध की श्रेणी में आता है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विदेश विभाग ने इस रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं।

 ‘मिडडे मील’ में गरीबी और बच्चों की भूख की कहानी

मजीदी की नई फिल्म ‘मिडडे मील’ दक्षिण-पूर्वी ईरान के चाबहार क्षेत्र के एक गरीब गांव में रहने वाले शिक्षक दावूद सोलन की कहानी है। वह एक अस्थायी शिक्षक है और वर्षों की मेहनत के बाद उसे सरकारी नौकरी में स्थायी होने की उम्मीद है। इससे वह अपनी बुजुर्ग मां के लिए बेहतर घर खरीदने का सपना ( Busan International Film festival) देखता है।

फिल्म में दिखाया गया है कि गांव के कई गरीब बच्चों के लिए स्कूल आने की सबसे बड़ी वजह वहां मिलने वाला मुफ्त दोपहर का भोजन है। यह भोजन सरकार के बजाय एक धनी व्यक्ति की मदद से उपलब्ध कराया जाता है। उसकी मृत्यु के बाद जब उसके वारिस आर्थिक सहायता बंद कर देते हैं, तो बच्चों को भोजन मिलना बंद हो जाता है। इसके बाद बच्चे स्कूल आना भी कम कर देते हैं।

ऐसे में शिक्षक के सामने बच्चों को भोजन उपलब्ध कराने और अपनी नौकरी बचाने की चुनौती खड़ी हो जाती है। वह अपनी मां के साथ स्कूल में रहने लगता है और अपनी सीमित बचत से बच्चों के लिए खाना तैयार करता है। आसपास के स्कूल बंद होने के कारण और भी भूखे बच्चे उसके स्कूल पहुंचने लगते हैं। शिक्षक के सामने सवाल होता है कि वह सभी बच्चों को खाना खिलाए या अपने और अपनी मां के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए कुछ बच्चों को लौटने दे।

बच्चों के भोजन का इंतजाम करने के लिए वह सीमा पार ईंधन की तस्करी जैसे गैरकानूनी रास्ते का सहारा भी लेता है। फिल्म के जरिए निर्देशक ने गरीबी, मानवीय संवेदना, नैतिक दुविधा और अपने भविष्य को बचाने की मजबूरी के बीच पैदा होने वाले संघर्ष (Busan International Film Festival) को सामने रखा है।

 गैर-पेशेवर कलाकारों के साथ बनाई फिल्म

मजीद मजीदी ने फिल्म में वास्तविक जीवन से जुड़े लोगों को कलाकार के रूप में शामिल किया है। उनके मुताबिक, फिल्म में नजर आने वाले सभी चेहरे गैर-पेशेवर कलाकारों के हैं। उन्होंने फिल्म के किरदारों के अनुरूप लोगों की तलाश के लिए कई महीनों तक स्थानीय इलाकों में काम किया।

निर्देशक का मानना है कि वास्तविक जीवन के अनुभवों से जुड़े चेहरे कहानी को अधिक स्वाभाविक बनाते हैं। फिल्म में शिक्षक की भूमिका निभाने वाले मोहम्मद रहीमी और उनकी मां का किरदार निभाने वाली खेयरी जाकेरी ने अभिनय के जरिए कहानी के भावनात्मक पक्ष को प्रभावी बनाया है।

फिल्म की सिनेमैटोग्राफी में चाबहार क्षेत्र की अनोखी चट्टानों और दुर्गम पहाड़ियों को प्रमुखता दी गई है। इस क्षेत्र की चट्टानी संरचनाओं को अक्सर ईरान के ‘मार्सियन माउंटेन्स’ यानी मंगल ग्रह जैसी पहाड़ियों के नाम से जाना जाता है। मजीदी ने बताया कि उन्होंने ड्रोन से लिए गए दृश्यों के जरिए इस प्राकृतिक भूभाग और वहां रहने वाले लोगों के संघर्ष को पर्दे पर उकेरने की कोशिश की।

 ‘चिल्ड्रेन ऑफ हेवन’ से मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान

मजीद मजीदी विश्व सिनेमा के चर्चित ईरानी निर्देशकों में शामिल हैं। उनकी वर्ष 1997 में आई फिल्म ‘चिल्ड्रेन ऑफ हेवन’ सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषा फिल्म श्रेणी में ऑस्कर के लिए नामांकित होने वाली पहली ईरानी फिल्म बनी थी। इसके अलावा ‘द कलर ऑफ पैराडाइज’ (1999) और ‘बरान’ (2001) को मॉन्ट्रियल फिल्म महोत्सव में शीर्ष पुरस्कार मिला था।

उनकी फिल्म ‘सन चिल्ड्रन’ वर्ष 2020 में वेनिस फिल्म महोत्सव में प्रदर्शित हुई थी। इस फिल्म में अभिनय करने वाले रुहोल्लाह जमानी को मार्सेलो मास्त्रोयानी पुरस्कार मिला था।

मजीदी ने बताया कि ‘मिड डे मील’ की कहानी उन्होंने अमेरिका और इजरायल के ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू होने से पहले ही तैयार की थी। हालांकि, उनके मुताबिक मौजूदा संघर्ष ने फिल्म के संदेश को और प्रासंगिक बना दिया है।

उन्होंने कहा कि ईरान पर लंबे समय से लगाए जा रहे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण आम लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। मौजूदा नाकेबंदी से दवाओं की उपलब्धता पर भी असर पड़ने की बात कहते हुए उन्होंने बीमार बच्चों की परेशानी का उल्लेख किया।

मजीदी ने सवाल उठाया कि विश्व शक्तियां मानवाधिकारों की बात करती हैं, लेकिन जब आम लोग बिना किसी गलती के तकलीफ झेलते हैं, तो उनके प्रति चिंता कहां दिखाई देती है। उनके अनुसार, आम ईरानी नागरिक शांति से जीवन बिताना चाहते हैं, लेकिन युद्ध और प्रतिबंधों का बोझ उन्हें उठाना पड़ रहा है।

 31वां बुसान अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव संपन्न

दक्षिण कोरिया में 6 से 15 अक्टूबर 2026 तक 31वें बुसान अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव का आयोजन किया गया। इस महोत्सव में ईरानी फिल्मकार माजिद मजीदी की फिल्म ‘मिडडे मील’ को सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार मिला। महोत्सव का आयोजन बुसान सिनेमा सेंटर में हुआ, जिसमें दुनियाभर के सिनेमा जगत की फिल्मों और कलाकारों ने भाग लिया।

महोत्सव के प्रमुख आयोजकों में जंग हान-सोक (फेस्टिवल डायरेक्टर) और चोई सून-डे (आर्टिस्टिक डायरेक्टर) शामिल थे। प्रतियोगिता श्रेणी की जूरी के अध्यक्ष प्रसिद्ध चीनी फिल्मकार झांग यिमू थे।

इस वर्ष महोत्सव में 59 देशों की कुल 316 फिल्मों का प्रदर्शन किया गया। इनमें 95 फिल्मों का विश्व प्रीमियर भी शामिल था। उद्घाटन फिल्म किम जोंग-क्वान के निर्देशन में बनी ‘द टेबल: डे एंड नाइट’ थी, जबकि झांग लू के निर्देशन वाली ‘ग्लोमिंग इन लुओमु’ के साथ महोत्सव का समापन हुआ।

 प्रमुख पुरस्कार विजेता

सर्वश्रेष्ठ फिल्म (बुसान अवॉर्ड): ‘मिडडे मील’ — माजिद मजीदी

विशेष जूरी पुरस्कार: ‘माय मदर’ — एडी काह्योनों

सर्वश्रेष्ठ निर्देशक: ली यून-चान — ‘टू बी ऑर्डिनरी’

सर्वश्रेष्ठ अभिनेता: झोउ शुन — ‘द फर्स्ट टेस्ट ऑफ लोनलीनेस’

सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री: काशुन हिमेनो — ‘सातोको ऑलवेज’

न्यू करंट्स अवॉर्ड: ‘बर्ड्स इन द डार्क’ — शशांक वालिया

विशेष सम्मान

महोत्सव में अंतरराष्ट्रीय सिनेमा में योगदान के लिए कई प्रतिष्ठित हस्तियों को विशेष सम्मान दिया गया। मिशेल योह को ‘एशियन फिल्ममेकर ऑफ द ईयर’ सम्मान मिला। एन हुई को ‘कैमेलिया अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया, जबकि किम डोंग-हो कोरियाई फिल्म उपलब्धि पुरस्कार के लिए चुने गए।

31वें बुसान अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में माजिद मजीदी की फिल्म ‘मिडडे मील’ की जीत को इस वर्ष के प्रमुख सिनेमाई आकर्षणों में गिना गया।

इसे भी पढ़ें – आर्मीनिया में एप्रिकॉट ट्री डॉक्यूमेंट्री फिल्म फेस्टिवल में ईरानी फिल्में और ज्यूरी शामिल

You may also like
Jharkhand Rupi Soren News : हजारों लोगों की मौजूदगी में नेमरा में संपन्न हुआ रूपी सोरेन का संस्कार भोज, जमशेदपुर से पहुंचे JMM नेता सरफराज हुसैन +VDO
UP Jail News : यूपी की जेलों में सुरक्षा हुई हाईटेक, 7 हजार से अधिक CCTV कैमरे और AI निगरानी से मजबूत हुई व्यवस्था
Kolkata Durga Puja Accident : कोलकाता के चोरबागान पंडाल में भगदड़, 17 लोगों की मौत और 25 घायल
Jamshedpur News : जमशेदपुर में राशन वितरण में लापरवाही पर चार बीएसओ को शो-कॉज, संवेदकों को ब्लैकलिस्ट करने की चेतावनी

Leave a Reply