Jamshedpur (Jharkhand) : जमशेदपुर के बारीडीह 10 नंबर ज़ोन अंतर्गत वरदान कॉलोनी में शनिवार को आदिवासी भूमिज समाज की जमीन को लेकर जमकर हंगामा (Jamshedpur Land Scam) हुआ। मामला खाता नंबर 17 और प्लॉट नंबर 4097 से जुड़ा है, जिसके मूल खाता धारक स्वर्गीय मोहन भूमिज और भागवत भूमिज बताए जा रहे हैं। आरोप है कि सीएनटी एक्ट से संरक्षित इस आदिवासी जमीन पर कुछ लोगों ने अवैध रूप से निर्माण कार्य शुरू कर दिया, जिसके बाद भूमिज समाज के लोग बड़ी संख्या में मौके पर पहुंच गए और निर्माण कार्य तत्काल रुकवा दिया।
भूमिज समाज का कहना है कि सीएनटी एक्ट के तहत आदिवासी भूमि की खरीद-बिक्री नहीं हो सकती, इसके बावजूद 28 लोगों के नाम पंजी टू में दर्ज कराए (Jamshedpur Land Scam) गए हैं। हैरानी की बात यह बताई जा रही है कि अंचल अधिकारी (सीओ) द्वारा म्यूटेशन आवेदन रिजेक्ट किए जाने के बाद भी कथित तौर पर पंजी टू में नाम चढ़ा दिए गए। इसे लेकर समाज ने अंचल कार्यालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
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प्रदर्शनकारियों ने जमीन को आदिवासी भूमि बताते हुए स्थल पर बोर्ड भी लगाया। भूमिज समाज के अनुसार यह जमीन पहले दो एकड़ 42 डिस्मिल थी, लेकिन हाल ही में अमीन द्वारा की गई मापी में मात्र 68 डिस्मिल जमीन ही बची पाई गई है। शेष जमीन पर अवैध कब्जे का आरोप है। इस मामले में अवैध कब्जा हटाने को लेकर एलआरडीसी कार्यालय में केस भी दर्ज कराया गया है।
समाज का आरोप है कि पेसा कानून लागू होने और केस दर्ज होने के बाद अवैध तरीके से जमीन की खरीद-फरोख्त करने वालों में हड़कंप मचा हुआ है, इसी वजह से आनन-फानन में निर्माण कार्य शुरू किया गया। भूमिज समाज के अमर सिंह सरदार ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है।
वहीं, जमीन के वर्तमान दावेदार दुष्यंत पाल ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि वे इस जमीन के वैध मालिक हैं और उनके पास सभी जरूरी दस्तावेज मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि यदि भूमिज समाज इस मामले को हाई कोर्ट ले जाना चाहता है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है और वे न्यायालय के समक्ष अपने सभी कागजात पेश करने को तैयार हैं।




