Jamshedpur (Jharkhand) : युवा कारोबारी निखार सबलोक हत्याकांड के मुख्य साजिशकर्ता बताए जा रहे अशोक कुमार सिंह उर्फ राघव को शुक्रवार को टाटा मुख्य अस्पताल (टीएमएच) से छुट्टी मिलने के बाद पुलिस ने अपनी कस्टडी में (Jamshedpur Nikhar Sablok Murder) ले लिया। इसके बाद उसे चांडिल अनुमंडल न्यायालय में पेश किया गया, जहां न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद सरायकेला मंडल कारा भेज दिया गया।
कोर्ट में राघव के वकीलों ने उसकी खराब तबीयत का हवाला देते हुए इलाज जारी रखने और अस्पताल में भर्ती रखने की मांग की। हालांकि, अदालत ने दलील स्वीकार नहीं की और उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेजने का (Jamshedpur Nikhar Sablok Murder) आदेश दिया।
राघव से मिलने के लिए उसकी पत्नी भी चांडिल कोर्ट पहुंची थी। उसके कुछ करीबी और समर्थक भी न्यायालय परिसर में मौजूद बताए गए। चर्चा है कि जेल जाने के बाद राघव की ओर से जेल अस्पताल में भर्ती होने और वहां से एमजीएम अस्पताल या किसी अन्य अस्पताल में इलाज के लिए भेजे जाने का प्रयास किया जा सकता है।
निखार हत्याकांड के बाद बढ़ीं मुश्किलें
निखार सबलोक हत्याकांड की जांच में राघव का नाम मुख्य साजिशकर्ता के रूप में सामने आने के बाद उसकी मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। उस पर पहली बार हत्या जैसे गंभीर अपराध का आरोप लगा है। इसके अलावा बिष्टुपुर थाना में सीएच एरिया स्थित एक मकान पर कब्जे के प्रयास, अपहरण, धमकी देने और पांच करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने के आरोप में भी मामले दर्ज हैं। निखार हत्याकांड के बाद उसके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों की संख्या बढ़कर चार हो गई है।
पुराने आपराधिक संपर्कों की भी जांच
राघव लंबे समय से माफिया डॉन अखिलेश सिंह और विक्रम शर्मा का करीबी रहा है। हालांकि, इससे पहले किसी बड़े आपराधिक मामले में उसका नाम प्रमुख रूप से सामने नहीं आया था। अब पुलिस निखार हत्याकांड की जांच के साथ उसके पुराने संपर्कों, गतिविधियों और कथित आर्थिक लेन-देन की भी पड़ताल कर रही है।
बताया जाता है कि अखिलेश सिंह के लंबे समय तक दुमका जेल में रहने के दौरान राघव विक्रम शर्मा के साथ रहा था। 13 फरवरी 2026 को देहरादून में विक्रम शर्मा की हत्या के बाद भी पुलिस की नजर राघव के पुराने आपराधिक संपर्कों और गतिविधियों पर बनी रही। अब निखार हत्याकांड के बाद उसके पुराने नेटवर्क और कथित आर्थिक लेन-देन की जांच फिर तेज हो गई है।
2011 के कथित लेन-देन मामले में भी आया था नाम
वर्ष 2011 में सोनारी थाना प्रभारी रहे ललित कुमार से जुड़े कथित पैसे के लेन-देन के मामले में भी राघव की भूमिका सामने आई थी। आरोप है कि उसने कथित बातचीत की कॉल रिकॉर्डिंग तत्कालीन डीजीपी को भेजी थी। इसके बाद थाना प्रभारी का जिले से तबादला कर दिया गया था और मामले में लंबे समय तक विभागीय जांच चली थी।धोरोम सेनेलेद् 2026: संथाल समाज की पारंपरिक व्यवस्था और धार्मिक संस्कृति को मजबूत करने पर जोर
निखार सबलोक हत्याकांड के बाद अशोक सिंह राघव की पुरानी गतिविधियां, आपराधिक संपर्क और कथित आर्थिक लेन-देन एक बार फिर पुलिस की जांच के दायरे में हैं। पुलिस मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है।




