Mashahad (Iran): ईरान की इस्लामी क्रांति के नेता आयतुल्ला सैयद अली खामेनेई को गुरुवार को मशहद स्थित इमाम रज़ा (अ.स.) के पवित्र रौज़े के निकट पूरे राजकीय और धार्मिक सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-खाक (Iran Supreme Leader Funeral) कर दिया गया। कई दिनों तक चले राष्ट्रीय शोक और अंतिम विदाई कार्यक्रम का समापन मशहद में हुआ, जहां देश-विदेश से पहुंचे लाखों-करोड़ों शोकाकुल लोगों ने उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि (Iran Supreme Leader Funeral) अर्पित की।
तेहरान, क़ुम, नजफ़ और कर्बला में आयोजित भव्य अंतिम यात्रा के बाद खामेनेई का पार्थिव शरीर मशहद पहुंचा। सुबह से ही सड़कों पर लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा। अंतिम यात्रा के दौरान पूरा शहर मातम, दुआओं और श्रद्धांजलि के नारों से गूंजता रहा।
ईरान के विभिन्न प्रांतों से आए लोगों के साथ-साथ कुर्द, तुर्क, अरब, लोर और अन्य समुदायों के लोगों ने भी अंतिम यात्रा में भाग लिया। बड़ी संख्या में महिलाएं, बुजुर्ग और युवा इस ऐतिहासिक मौके के साक्षी बने।
अंतिम यात्रा में अफगानिस्तान, पाकिस्तान, भारत, तुर्किये, नाइजीरिया सहित कई देशों से आए श्रद्धालुओं की भी उल्लेखनीय उपस्थिति रही। विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने खामेनेई के नेतृत्व, ईरान की स्वतंत्रता और प्रतिरोध की नीति को श्रद्धांजलि दी।
अंतिम नमाज़ की अगुवाई उनके बड़े पुत्र सैयद मुस्तफा खामेनेई ने की। भारी भीड़ के कारण नमाज़ केवल इमाम रज़ा दरगाह परिसर तक सीमित नहीं रही, बल्कि आसपास की कई प्रमुख सड़कों पर भी अदा की गई।
भीड़ अत्यधिक होने के कारण अंतिम यात्रा के दौरान कुछ समय के लिए मार्ग में बदलाव करना पड़ा। बाद में हेलीकॉप्टर के माध्यम से पार्थिव शरीर को पवित्र परिसर तक पहुंचाया गया, जहां दार-अज़-ज़िक्र प्रार्थना स्थल के निकट उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया गया।
अंतिम यात्रा के दौरान लोगों ने ईरान की एकता, स्वतंत्रता और प्रतिरोध के समर्थन में नारे लगाए। श्रद्धांजलि सभा देर रात तक जारी रही और हजारों लोग इमाम रज़ा के रौज़े के आसपास दुआएं और मातमी कार्यक्रमों में शामिल रहे।
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ईरान में आयोजित इस अंतिम विदाई समारोह को हाल के वर्षों की सबसे बड़ी जनभागीदारी वाले आयोजनों में से एक माना जा रहा है। सरकार और धार्मिक नेतृत्व ने इसे राष्ट्रीय एकता और अंतरराष्ट्रीय समर्थन का प्रतीक बताया।




