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एमजीएम थाना पुलिस की हिरासत में युवक की मौत पर होगी न्यायिक जांच, SSP ने प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश को लिखा पत्र

Jamshedpur (Jharkhand) : जमशेदपुर में पुलिस हिरासत के दौरान 22 वर्षीय युवक की मौत (Jamshedpur Custodial Death) के मामले ने तूल पकड़ लिया है। एमजीएम थाना क्षेत्र के गोकुल नगर निवासी जीत महतो की एमजीएम थाना पुलिस की हिरासत में हुई संदिग्ध मौत को लेकर अब न्यायिक जांच कराई जाएगी। इस संबंध में जमशेदपुर के एसएसपी ने प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश को अनुरोध पत्र भेजा है।

गौरतलब है कि जीत महतो को चोरी का मोबाइल खरीदने के आरोप में पुलिस हिरासत में लिया गया था। परिजनों का आरोप है कि जीत पहले से गंभीर बीमारी से पीड़ित था और इसकी जानकारी पुलिस को दी गई थी, इसके बावजूद उसे थाने में रखा गया और समय पर इलाज नहीं कराया गया। इलाज के अभाव में उसकी मौत हो गई।

घटना के बाद दंडाधिकारी की मौजूदगी में वीडियोग्राफी के साथ पोस्टमार्टम (Jamshedpur Custodial Death) कराया गया। पुलिस का दावा है कि मृत्यु समीक्षा रिपोर्ट में शरीर पर किसी भी तरह की बाहरी चोट या प्रताड़ना के निशान नहीं मिले हैं। एमजीएम अस्पताल के ऑन-ड्यूटी डॉक्टर की रिपोर्ट में मौत का कारण Complicated Cerebral Malaria बताया गया है।

हालांकि सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब युवक की हालत गंभीर थी, तो उसे पहले ही अस्पताल में भर्ती क्यों नहीं कराया गया और उसे थाने में क्यों रखा गया। पुलिस का कहना है कि तबीयत बिगड़ने पर उसे पीआर बांड पर छोड़ा गया और मानवीय आधार पर अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इसी बात पर संदेह जताया जा रहा है कि यदि उसे छोड़ा गया था तो पुलिस उसे अस्पताल क्यों और कैसे लेकर गई।

इस मामले को लेकर सियासत भी गरमा गई है। जमशेदपुर के सांसद विद्युत वरण महतो ने पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि परिजनों को कथित तौर पर दो लाख रुपये दिए गए, जिससे मामला दबाने की आशंका है। हालांकि पुलिस प्रशासन ने ऐसे किसी भी भुगतान से इनकार किया है। दूसरी तरफ, पू्र्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा, जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता की पत्नी सुधा गुप्ता भी गोकुल नगर पहुंचीं और मामले में मृतक के परिजनों से मुलाकात कर निष्पक्ष जांच की मांग की।

ग्रामीण एसपी ऋषभ गर्ग ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि युवक पहले से ही गंभीर बीमारियों से ग्रसित था। डॉक्टरों के अनुसार उसे ब्रेन फीवर, प्लेटलेट्स की कमी, लीवर डैमेज और पीलिया जैसी समस्याएं थीं। पीएम रिपोर्ट में किसी भी तरह की बाहरी चोट नहीं मिली है।

इसे भी पढ़ें – जमशेदपुर में पुलिस हिरासत में युवक की मौत पर सवाल, परिजनों का आरोप-मना करने पर बीमार को थाने ले गई थी पुलिस, नहीं मिल सका था इलाज

गौरतलब है कि जीत महतो की मौत के दिन ही उसके घर बेटे का जन्म हुआ, जिसे वह कभी देख नहीं सका। यह घटना अब झारखंड में पुलिस हिरासत में मौत को लेकर एक बड़े सवाल और बहस का विषय बन गई है। न्यायिक जांच से ही अब सच्चाई सामने आने की उम्मीद है।

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