News Bee : हज़रत फातमा ज़हरा (SA) रसूल-ए-अकरम हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा (PBUH) की प्यारी बेटी और मुसलमानों की नज़रों में सम्मानित हस्ती हैं । उनकी शहादत की बरसी दुनिया भर में ग़म और अज़ादारी के साथ (Ayyame Fatmi Jamshedpur ) मनाई जा रही है। ईरान सहित विभिन्न देशों में लाखों शिया मुसलमानों ने मजलिसें आयोजित कर उनकी शहादत को याद किया।
शिया मत के अनुसार हज़रत फातमा ज़हरा (SA) की शहादत 13 जमादिउल उला को हुई थी। इसी उपलक्ष्य में दुनिया के कई देशों में मजलिस, नौहाख़ानी और सीनाज़नी (Ayyame Fatmi Jamshedpur) की गई।
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ईरान में आयोजित केंद्रीय कार्यक्रमों में हज़रत फातिमा ज़हरा (SA) के जीवन, इस्लाम में उनके योगदान और उनके उच्च चरित्र पर विद्वानों ने ख़िताब किया। उन्हें “अज़-ज़हरा” यानी रोशन और पाक कहा जाता है, और रसूल-ए-करीम (PBUH) ने उन्हें “सय्यिदा-ए-निसा-ए-आलमीन” (दुनिया की औरतों की सरदार) कहा है।
भारत में भी हज़रत फातिमा ज़हरा (SA) की याद में व्यापक अज़ादारी देखने को मिली। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, हैदराबाद, इलाहाबाद, भोपाल, लखनऊ, कानपुर सहित कई बड़े शहरों में मजलिसों का आयोजन हुआ।
झारखंड में रांची, जमशेदपुर, जपला हुसैनाबाद और धनबाद में भी शिया समुदाय ने मजलिसें कीं। मजलिस के बाद नौहाख़ानी और सीनाज़नी करते हुए लोगों ने हज़रत फातिमा ज़हरा (SA) को खिराज-ए-अक़ीदत पेश किया।
इस अवसर पर उलेमाओं ने कहा कि हज़रत फातिमा ज़हरा (SA) ईमान, सादगी, सब्र और इंसानियत की मिसाल हैं। उनका जीवन और उनके उसूल आज भी दुनिया भर के मुसलमानों के लिए प्रेरणा हैं।




