साकची के हुसैनी मिशन के इमामबाड़े में हुई मजलिस-ए-हुसैन
जमशेदपुर: (Jamshedpur Muharram ) साकची में शुक्रवार की रात पहली मुहर्रम को मजलिस-ए-हुसैन का आयोजन किया गया। इस मजलिस को मौलाना सादिक अली ने खिताब फरमाया। इस मजलिस के बाद नौहा पढ़ा गया और मातम हुआ। यहां मजलिस का सिलसिला 12 मुहर्रम तक चलेगा। (Jamshedpur Muharram)
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मजलिस से पहले मर्सिया पढ़ा गया। मर्सिया इनाम अब्बास ने पढ़ा। मर्सिया के बाद मौलाना सादिक अली ने मजलिस को खिताब फरमाया। मजलिस में उन्होंने कहा कि हज़रत अली अलैहिस्सलाम की मुहब्बत के लिए नस्ल का पाक होना जरूरी है। जबकि, इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम का गम उसी के दिल में रहती है, जिसका दिल पाक हो।

Jamshedpur Muharram : मर्सिया पढ़ते सगीर हुसैन
उन्होंने कहा कि अभी दुनिया ने देखा कि किस तरह एक वेलायत-ए-फकीह ने सुपर पावर कही जाने वाली ताकत को झुका दिया। मौलाना ने कहा कि कर्बला ने हमें कुर्बानी का जज़्बा दिया है। मौलाना ने पढ़ा कि अगर तुम्हें नेक काम कर 70 सवाब हासिल करना है तो उसका तरीका अलग है। इसके लिए हम जिसकी मदद कर रहे हैं, उसे अच्छी चीज दें। जिसकी मदद करें वह मुस्तहक यानि पात्र हो। यही नहीं यह नेक काम छिपा कर करें। तब एक नेक काम का 70 सवाब मिलेगा। मौलाना सादिक अली ने मसाएब में इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की मदीना-ए-मुनव्वरा से कर्बला की रवानगी का जिक्र किया।
Jamshedpur Muharram: मसाएब सुन रोए अजादार
मौलाना ने पढ़ा कि इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम जब रवाना होने लगे। इमाम के छह महीने के बेटे हजरत अली असगर अपनी बहन जनाबे सोगरा की गोद में थे। वह चलने के लिए तैयार नहीं हो रहे थे। इमाम ने उनके कान में कुछ कहा तो वह कर्बला जाने के लिए अपनी मां की आगोश में आ गए। इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की मदीना से कर्बला रवानगी का जिक्र सुनकर अजादार जारो कतार रोए। मजलिस के बाद नौहा खानी हुई।
