Ranchi : वाराणसी में एसटीएफ के हाथों मारा गया प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन तृतीय सम्मेलन प्रस्तुति कमेटी (टीएसपीसी) का सुप्रीमो ब्रजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह भोक्ता झारखंड के चतरा जिले के लावालौंग थाना क्षेत्र स्थित लुट्टू सोहावन गांव (Jharkhand Naxal Commander) का रहने वाला था। वह पच्चु गंझू का बेटा था। कभी गांव की पंचायत में निर्विरोध मुखिया चुना गया यह शख्स बाद में झारखंड का 30 लाख रुपये का (Jharkhand Naxal Commander) इनामी उग्रवादी बन गया।
बताया जाता है कि साल 2004 में ब्रजेश गंझू ने प्रतिबंधित भाकपा माओवादी के खिलाफ समानांतर संगठन खड़ा किया। इसी संगठन ने आगे चलकर TSPC के रूप में चतरा के अलावा हजारीबाग, रांची, रामगढ़, पलामू और लातेहार समेत बिहार के कुछ इलाकों में अपना असर बढ़ाया। माओवादियों और टीएसपीसी के बीच लंबे अरसे तक वर्चस्व की लड़ाई चली। इस दौरान कई मुठभेड़ और हिंसक वारदातें हुईं।
ब्रजेश ने उग्रवादी गतिविधियों के साथ सियासी रास्ता भी अपनाया। वर्ष 2010 में वह लावालौंग पंचायत से निर्विरोध मुखिया चुना गया। हालांकि मुखिया बनने के बाद भी उसका नाम उग्रवादी गतिविधियों से जुड़ा रहा और पुलिस की निगाह में वह लगातार रहा।
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, उसके खिलाफ हत्या, हत्या की कोशिश, अपहरण, रंगदारी, लूट, आर्म्स एक्ट, यूएपीए और सीएलए एक्ट समेत करीब 44 मामले दर्ज थे। इनमें पुलिस जवानों पर हमला, हत्या और रंगदारी से जुड़े मामले भी शामिल हैं।
झारखंड सरकार ने उस पर 25 लाख और एनआईए ने पांच लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। रविवार को वाराणसी के रामनगर में यूपी एटीएस के साथ मुठभेड़ में वह मारा गया। पुलिस के मुताबिक, जवाबी फायरिंग में जख्मी होने के बाद अस्पताल में उसकी मौत हो गई।
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