न्यूज़ बी : Iran America War के बाद अब ईरान के विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अराक़ची ने कहा है कि उनका देश अमेरिका के साथ सम्मानजनक और गरिमामयी आधार पर बातचीत फिर से शुरू करने के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए अमेरिका को पहले अपनी पुरानी गलतियों का मुआवजा देना होगा और यह गारंटी देनी होगी कि बातचीत के दौरान कोई भी सैन्य हमला ( Iran America War) नहीं होगा।
गुरुवार को ले मोंड अख़बार को दिए गए एक साक्षात्कार में अराक़ची ने कहा कि ईरान हमेशा तर्क और सम्मान के साथ बातचीत करता आया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में कुछ मित्र देशों के ज़रिए राजनयिक संपर्क स्थापित किए जा रहे हैं।
अराक़ची ने साफ़ कहा, “डिप्लोमेसी एक दोतरफा रास्ता है। अमेरिका ने ही बातचीत तोड़ी थी और सैन्य कार्रवाई की थी। इसलिए अब उसकी ज़िम्मेदारी बनती है कि वह अपने व्यवहार में बदलाव करे और यह भरोसा दिलाए कि आगे कोई हमला नहीं होगा।”
उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका के हमलों से ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचा है और इसकी भरपाई की मांग करना ईरान का अधिकार है। उनके अनुसार, यह केवल ईमारतों का मामला नहीं है, बल्कि एक राष्ट्र की वैज्ञानिक उपलब्धियों और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का भी सवाल है।
ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम पर अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी लगातार जारी है, और अब तक कोई सैन्य गड़बड़ी नहीं पाई गई है। अराक़ची ने कहा, “यह हमला केवल ईरान पर नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय नियमों और परमाणु अप्रसार संधि (NPT) पर भी आघात है।”
उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने दोबारा प्रतिबंध या सैन्य धमकियां दीं, तो बातचीत की संभावनाएं खत्म हो जाएंगी। तीन यूरोपीय देशों द्वारा 2015 परमाणु समझौते के तहत प्रतिबंधों की प्रक्रिया फिर से शुरू करने की बात पर अराक़ची ने कहा कि यह कदम एक सैन्य कार्रवाई के समान होगा और इससे यूरोप की भूमिका भी समाप्त हो जाएगी।
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गौरतलब है कि 13 जून को इज़राइल ने ईरान पर सीधी सैन्य कार्रवाई की, जिसमें कई उच्च पदस्थ सैन्य कमांडर और परमाणु वैज्ञानिक मारे गए। 22 जून को अमेरिका ने भी ईरान की तीन परमाणु साइटों पर हमला किया, जो संयुक्त राष्ट्र चार्टर और एनपीटी के खिलाफ था। 24 जून को अमेरिका की ओर से इज़राइल ने खुद को इस युद्ध से अलग करने की घोषणा की।
अराक़ची ने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान NPT से हटने का कोई इरादा नहीं रखता और उसका परमाणु कार्यक्रम केवल चिकित्सा, ऊर्जा और कृषि जरूरतों के लिए है। उन्होंने दोहराया कि ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता द्वारा परमाणु हथियारों के निर्माण, संग्रहण या उपयोग के खिलाफ फतवा जारी है।
उन्होंने अंत में कहा, “यूरेनियम संवर्धन की मात्रा हमारी ज़रूरतों के अनुसार तय होती है और इसका उद्देश्य केवल चिकित्सा व औषधीय उपयोग के लिए रेडियोफार्मास्यूटिकल्स बनाना है।”
झारखंड में इस मुद्दे को लेकर बढ़ती जागरूकता
इस वैश्विक मुद्दे की गूंज झारखंड तक पहुंच रही है, जहां युवाओं और छात्र संगठनों के बीच अंतरराष्ट्रीय राजनीति, परमाणु अप्रसार और पश्चिमी देशों के हस्तक्षेप जैसे विषयों पर चर्चा बढ़ गई है। विशेष रूप से जमशेदपुर और रांची के विश्वविद्यालयों में छात्रों द्वारा इस पर सेमिनार और पैनल डिस्कशन भी आयोजित किए जा रहे हैं।




