साकची में हुसैनी मिशन की इमामबाड़े में तीन मुहर्रम की मजलिस संपन्न
Jamshedpur : जमशेदपुर में मुहर्रम का पर्व पूरे अकीदत और एहतेराम के साथ मनाया जा रहा है। रविवार तीन मुहर्रम को मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना सादिक अली ने हजरत हुर अलैहिस्सलाम के बारे लोगों को जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जब इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम कूफे की तरफ बढ़ रहे थे तो यजीद के हुक्म से हुर इमाम हुसैन को घेरने पहुंचा था। रास्ते में इराक के रेगिस्तान में हुर का लश्कर फंस गया। हुर का सारा लश्कर प्यासा था। (Jamshedpur News)
इसे भी पढ़ें – Jamshedpur Muharram: साकची में हुसैनी मिशन के इमामबाड़े में हुई मजलिस, इमाम हुसैन की कर्बला आमद की दास्तान हुई बयां
Jamshedpur News: मजलिस के बाद हुई नौहाखानी
इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने जब यह देखा तो अपने लिए जमा किया पानी हुर की फौज को पिला दिया। हुर के जानवरों को भी पानी पिलाया गया। बाद में जब इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम अपने काफिले के साथ आगे बढ़ने लगे तो हुर ने रोका अपनी सेना की घेराबंदी में चलने को कहा। इसे इमाम हुसैन ने नहीं माना। मगर हुर ने इमाम हुसैन के घोड़े की लगाम पकड़ ली। इस पर इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने कहा ऐ हुर लगाम छोड़ दे। वरना तेरी मां तेरे गम में बैठेगी। इस पर हुर ने लगाम तो छोड़ दी मगर, कहा कि अगर आपकी मां नबी की बेटी नहीं होती तो मैं आपके लिए भी यह जुमला इस्तेमाल करता।
बुद्धिजीवी वर्ग का मानना है कि हुर ने इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की मां का एहतेराम किया इसीलिए अल्लाह तआला ने 10 मोहर्रम को उसको निजात दी और हुर यजीदी खेमा छोड़ कर इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की तरफ आ गए। 10 मोहर्रम को जब जंग शुरू हुई तो हजरत हुर का बेटा यजीदी फौज से लड़ने गया। वह शहीद हुआ। तो हुर अपने बेटे की लाश लेने गए। मगर, इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने कहा कि ऐ हुर जवान बेटे की लाश एक बाप से नहीं उठेगी। इमाम हुसैन उसकी लाश को लेकर खैमे में आए। हजरत हुर के बेटे का मसाएब सुनकर अजादार जारोकतार रोए।
