सुवर्णरेखा और खरकई नदी में धड़ल्ले से हो रहा ऐसी नावों का इस्तेमाल, सुरक्षा के इंतजाम नहीं होने से कभी भी हो सकता है और बड़ा हादसा
Jamshedpur (Jharkhand) : सुवर्णरेखा और खरकई नदी में लकड़ी के कुछ पटरे एक-दूसरे से जोड़कर बनाई गई कमजोर नावों का इस्तेमाल लोगों की जान पर भारी पड़ (Jamshedpur Dangerous Boat) सकता है। इसके बावजूद शहर और आसपास के इलाकों में मछली पकड़ने और बालू निकालने के लिए ऐसी नावों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इन नावों की बनावट और सुरक्षा के इंतजामों को देखते हुए नदी में इनकी सवारी करना जोखिम भरा है। सुवर्णरेखा नदी में 24 सितंबर की रात दो युवकों के लापता होने की घटना ने इस खतरे को गंभीरता से सामने ला दिया है।
बारीडीह के मीरा पथ निवासी अमित कुमार उर्फ गजनी और जिला स्कूल रोड निवासी अमित कुमार उर्फ बिट्टू 24 सितंबर की रात अपने साथी विक्की के साथ इसी तरह की नाव से मछली पकड़ने सुवर्णरेखा नदी में गए थे। बताया गया कि नदी के बीच नाव का संतुलन बिगड़ने से वह पलट गई। विक्की किसी तरह तैरकर बाहर निकल आया, जबकि गजनी और बिट्टू तेज धार में बह गए। दोनों युवकों का अब तक पता नहीं चल (Jamshedpur Dangerous Boat) सका है।
लकड़ी के पटरे जोड़कर तैयार की जाती हैं नावें
नदी में इस्तेमाल होने वाली इन नावों को लकड़ी के कुछ पटरे एक-दूसरे से जोड़कर तैयार किया जाता है। इनकी बनावट, स्थिरता और सुरक्षा संबंधी इंतजामों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। नदी में पानी का बहाव तेज होने, जलस्तर में बदलाव आने या नाव पर संतुलन बिगड़ने की स्थिति में इनके पलटने का खतरा हो सकता है। इसके बावजूद लोग मछली पकड़ने और बालू निकालने जैसे कामों के लिए इनका इस्तेमाल कर रहे हैं।
सुवर्णरेखा नदी के अलावा खरकई नदी में भी इस तरह की नावें चलती दिखाई देती हैं। नदी में काम करने वाले लोग इनका इस्तेमाल अपनी जरूरतों के लिए करते हैं, लेकिन सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं होने पर यह जोखिम जानलेवा साबित हो सकता है। खासकर नदी के बीच जाने, तेज बहाव वाले हिस्सों में पहुंचने और नाव पर एक से अधिक लोगों के सवार होने की स्थिति में खतरा बढ़ सकता है।
14 दिन बाद भी दोनों युवकों का पता नहीं
गजनी और बिट्टू के लापता होने के 14 दिन बाद भी उनके परिवारों को कोई खबर नहीं मिली है। बिट्टू के बुजुर्ग पिता अवधेश साहू खुद नाव लेकर नदी में बेटे की तलाश कर रहे हैं। परिवार के लोग बहरागोड़ा तक नदी के किनारे खोजबीन कर चुके हैं, लेकिन अब तक कोई सफलता नहीं मिली है।
इस घटना ने नदी में इस्तेमाल की जा रही असुरक्षित नावों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। सवाल यह है कि जब मछली पकड़ने और बालू निकालने के लिए ऐसी नावों का लगातार इस्तेमाल हो रहा है, तो उनकी सुरक्षा की जांच और लोगों की जान बचाने के लिए जरूरी इंतजाम कितने प्रभावी हैं।
समय रहते नहीं चेते तो हो सकता है बड़ा हादसा
सुवर्णरेखा और खरकई नदी में इस तरह की नावों के इस्तेमाल पर सुरक्षा के नजरिये से ध्यान देने की जरूरत है। नावों की मजबूती, उनकी क्षमता, संतुलन और लाइफ जैकेट जैसे सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता की जांच जरूरी है। नदी में काम करने वाले लोगों को भी सुरक्षित नौका संचालन और आपात स्थिति में बचाव के उपायों के बारे में जागरूक करना आवश्यक है।
गजनी और बिट्टू के लापता होने की घटना एक गंभीर चेतावनी है। नदी में लकड़ी के पटरे जोड़कर बनाई गई कमजोर नावों से आवाजाही और कामकाज के दौरान सुरक्षा की अनदेखी किसी दूसरे परिवार को भी इसी तरह के दर्दनाक इंतजार में धकेल सकती है। जरूरत है कि संबंधित विभाग सुवर्णरेखा और खरकई नदी में ऐसी नावों के इस्तेमाल की जांच करें और हादसों को रोकने के लिए आवश्यक सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करें।
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