जमशेदपुर 🙁 Court News) कौमी सिख मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अधिवक्ता कुलविंदर सिंह ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्र द्वारा दिए गए फैसले पर सुप्रीम कोर्ट से संज्ञान लेने की अपील की है। अपने एक फैसले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्र के न्यायालय ने कहा है, “छाती को पकड़ना, उसके पाजामे का नाड़ा तोड़ना और उसे पुलिया के नीचे खींचने का प्रयास करना… बलात्कार या बलात्कार के प्रयास का आरोप लगाने के लिए पर्याप्त नहीं है.” कोर्ट ने ‘अपराध की तैयारी’ और ‘सच में अपराध करने का प्रयास’ करने में अंतर भी बताया है.
माननीय जस्टिस की यह परिभाषा देश के महिलाओं की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन गया है। शातिर अपराधी निचली अदालतों में बचाव करने के लिए इस फैसले को अस्त्र की तरह इस्तेमाल करेंगे। Court News
Court News : पहले भी हुए हैं ऐसे फैसले
कुलविंदर सिंह कहते हैं कि एक उदाहरण से समझा जा सकता है कि छत से धक्का दिया है, हत्या करने की कोशिश थोड़ी की है। कुलविंदर सिंह के अनुसार महाराष्ट्र में भी हाई कोर्ट की महिला जस्टिस ने दुष्कर्म के प्रयास में ऐसी व्याख्या दी थी, जिससे पूरा समाज शर्मसार हो रहा था। सुप्रीम कोर्ट ने उस फैसले को पलटा था और आज भी इस इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को पलटने की जरूरत है। जिससे लोगों की आस्था न्यायपालिका पर बनी रहे और अपराध कर्मियों पर भय बना रहे।
वहीं कुलविंदर सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल किया है कि उनके “बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ” का संकल्प कैसे पूरा होगा? जब इस तरह के फैसले आएंगे।