Jamshedpur 🙁 86 Basti) झारखंड के जमशेदपुर में 86 बस्तियों के मालिकाना हक को लेकर फिर से बहस तेज हो गई है। कौमी सिख मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अधिवक्ता कुलविंदर सिंह ने भारतीय जनता पार्टी की स्थानीय विधायक पूर्णिमा दास द्वारा इस मुद्दे को विधानसभा में उठाए जाने को “बिन मौसम का राग” करार दिया है।
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कुलविंदर सिंह का कहना है कि झारखंड बने 24 साल हो चुके हैं, लेकिन यह मुद्दा हर विधानसभा और लोकसभा चुनाव में उठता रहा है। 1990 के बाद से भारतीय जनता पार्टी ने इस क्षेत्र में राजनीतिक रूप से मजबूत पकड़ बनाए रखी, फिर भी 86 बस्तियों (86 Basti) के लोगों को मालिकाना हक नहीं मिल सका।
86 Basti : राजनीतिक दलों की भूमिका पर सवाल
उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्रियों अर्जुन मुंडा और रघुवर दास का जिक्र करते हुए कहा कि जब भाजपा के दो राष्ट्रीय स्तर के बड़े नेता इस समस्या का समाधान नहीं कर पाए, तो दूसरों से क्या उम्मीद की जा सकती है? उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस मामले में सभी राजनीतिक दलों की भूमिका संदिग्ध रही है।
86 Basti : राजनीति से ऊपर उठकर समाधान की जरूरत
86 बस्तियों के मालिकाना हक का मुद्दा सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहना चाहिए। कुलविंदर सिंह का मानना है कि यदि 86 बस्ती की जमीन टाटा लीज में होती और इसकी सबलीज की व्यवस्था होती, तो इस मामले का संवैधानिक समाधान संभव था। उन्होंने सभी दलों से इस मुद्दे को राजनीति से ऊपर उठकर हल करने की अपील की। गौरतलब है कि 86 बस्तियों को मालिकाना हक का मुद्दा काफी पुराना है। कोई भी राजनीतिक दल हो इस मुद्दे पर कभी गंभीर नहीं रहा। भाजपा ने तो इस मुद्दे पर कई चुनाव लड़े। मगर अब तक इस मुद्दे पर उन्होंने कुछ नहीं किया। आज भी इसे लेकर लोग परेशान हैं।